शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

‘60 पार के मंत्री‘

            मानव का स्वभाव है गलतियां करना और उन्हें क्षमा करने का वरदान भी हमें ही मिला है । तो गलतियां किये जाओ और क्षमादान लिए जाओ । मंत्री हुए तो क्या हुआ । हम मानव जाति से अलग थोडे ही हैं । हम तो कहते हैं कि संवैधानिक पद पर होने के नाते  गलतियां करने का संवैधानिक अधिकार भी हमारा जनता से ज्यादा है। वैसे भी हम तो भाई 60 पार के हैं । सठियाए हैं । सीनियर सिटीजन है । भला बुजुगों की गलतियों का भी कोई बुरा  मानता है। हमने तो सिर्फ पुर्तगाल का भाषण ही पढ़ा कोई पाकिस्तान का तो नहीं जो इतना बवाल मचाये हो। और हमने ऐसा कौनसा गुनाह किया बताओ । अरे हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री भी तो स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में कन्फ्यूज़ हो गए थे । तब किसी ने कुछ कहा । भई हम भी इंसान हैं गलती हो गई सो हो गई ।
     अब आप ही बताये मैं क्या करूं ? एक तो निकम्मा मेरा स्टाफ । हजार बार समझाया इन लोगों कि देर रात पार्टियों में न रूका करो दारू-शारू कम पिया करो ताकि दिमाग सुबह ठिकाने पर रहे । फ्री की है तो इसका मतलब ये तो नहीं
कि डकारे जाओ । कुछ कहो तो खीसें निपोरते हुए बेशर्मो की तरह बोलते हैं सर पता नहीं अगली बार विदेश यात्रा का मौका मिले न मिले । आये हैं तो एंजाय करने दीजिए सर।
            कमबख्त सुबह भूल गये मेरा भाषण फोल्डर में रखना । ढेर में कचरे की तरह पड़े थे तमाम देशों के भाषण । छांटो - बीनो जैसी हालत थी । हाथ में पुर्तगाल का आ गया । हम शुरू हो गये । भगवान कसम दो पेरा तक मुझे भी समझ
में नहीं आया पूरे फ्लो में पढ़ता जा रहा था । वो तो सेक्रटरी ने कहा सर दिस इज द ओरिजनल वन..  मैंने भी खिसियाते हुए झट से कागज झपट लिया । कुछ पल और पढ़ता तो देश की अस्मिता को बटटा तो लगता ही मंत्री पद से भी हाथ धो बैठता ।
     वैसे इस हादसे ने मेरी विदेश नीति के इस दावे को पुख्ता किया है कि चाहे विकसित देश हों या विकासशील समस्याएं सब की लगभग एक जैसी हैं । कोई पहले दो पैराग्राफ में सिमिट जाती हैं तो कोई पूरा पेज खा लेती है।
      हे !  भगवान तेरा लाख लाख शुक्रिया जो समय रहते तू ने बचा लिया वरना कौन जाने अंत में जयहिंद की जगह जय पुर्तगाल बोल जाता तो मैं मुंह दिखाने के काबिल भी न रहता।
-सुनील सक्सेना