हास्य व्यंग्य
लो आया “प्लेटॉनिक लव” का मौसम
-: सुनील सक्सेना
एक है मोहन और एक है सोहन । दोनों
दोस्त हैं । अब दोस्त क्या हैं, एक ही पीजी में, एक ही कमरे में रहते हैं । एक ही बाथरूम यूज करते हैं । सेम बाल्टी और मग शेयर करते हैं , तो मित्रता तो होना ही है । बावजूद
इसके कि दोनों का नेचर एकदम उलट है । यानी मजबूरी का मित्र गठबंधन है ।
मोहन, यथा नाम तथा गुण । हरकतें बिल्कुल
बंसीधर मुरलीवाले जैसी । चंचल, चपल, नटखट, रास रसैया ।
आज के हिसाब से बोले तो “माचो मेन”, “चिल”, “कूल डूड” । मिनिमम दो तीन कन्याओं से “हेंग आउट” रहता है । बचे-खुचे समय में आईआईटी क्रेक करने की
तैयारी कर रहा है ।
बरक्स सोहन एकदम धीर-गंभीर । फोकस
। पढ़ाकू । एक मात्र अंतिम लक्ष्य है उसका, प्रशासनिक सेवा में चयन । लाल बत्तीवाली गाड़ी । अब जवानी है तो कहानी
भी जरूरी है । वरना वो जवानी ही क्या जिसकी कोई कहानी न हो । सो अपनी जवानी का पूरा सम्मान
करते हुए, शगुन के तौर पर सोहन की भी एक अदद प्रेमिका
है ।
मोहन और सोहन की मित्रता को टिकाऊ
बनाये रखने का आधार है, मोहन की “गर्लफ्रेंड” और सोहन की “प्रेमिका” जो,
उनके पीजी के पास एक ही गर्ल्स हॉस्टल में रहती हैं । मोहन के पास बाइक है । सोहन पेट्रोल के पैसे
देता है । इस तरह दोनों अपनी-अपनी बंदियों से मिलने मोटर साइकल से
गर्ल्स हॉस्टल आते- जाते रहते हैं ।
मोहन का “अफेयर” और सोहन की “मोहब्बत” ग्रीन जोन में लागू लॉकडाउन में ठीक
ठाक चल रही है । आज जब वे दोनों अपनी
प्रेयसियों से मिलकर पीजी पहुंचे ही थे, कि मोहन को फोन पर खबर मिली कि “गर्ल्स हॉस्टल” को कोरोना संक्रमण के कारण सील कर
दिया है । हॉस्टल में एक-दो नहीं चार लड़कियां कोरोना पॉजिटव पाई गईं ।
खबर सुनते ही मोहन तुरंत वाशबेसिन
की ओर लपका । कुल्ला करने लगा । कभी होंठों को साफ करता, कभी जबान को “टंग क्लीनर” से साफ करने लगता । मुंह रगड़- रगड़ के धोने लगता । कभी हाथ बार-बार धोने लगता । फाइनली संक्रमण के संभावित खतरे को समूल नष्ट
करने के लिए वो नाहने चला गया । आधे घंटे बाद बाथरूम से निकला ।
सोहन ने पूछा “क्या हुआ यार तुझे, देख रहा हूं जब से मुंह धोये जा
रहा है । कुल्ले कर रहा है । गरारे कर रहा है । आखिर हुआ क्या ? अब तू नहा कर भी आगया । कुछ
बतायेगा भी । माजरा क्या है ?
मोहन ने घबराते हुए कहा – “भाई मेरी वाली है न “कोरोना पॉजिटिव” निकली है ।
“पर कैसे..?” सोहन ने चिंतित स्वर में पूछा
“वही होमडिलेवरी वाला लफड़ा । मेडम
ने पिज्जा बुलवाया था । आगई चपेट में । पर साले…तू बता । तू भी तो अभी मेरे साथ ही
अपनी वाली से मिलकर आ रहा है । तू तो ऐसे चुपचाप
बैठा है, जैसे तुझे “इच्छा मृत्यु” का वरदान प्राप्त हो । बेटा ये
कोरोना है । ज्यादा होशियार मत बन । एक
बार कोरोना चेंट गया न, तो किसी को नहीं छोड़ता ।” मोहन ने सोहन को हादसे की गंभीरता
बताते हुए कहा ।
“तुझे पता है न मैं “कोविड 19” की गाइड लाइन को स्ट्रिक्टली फॉलो कर रहा हूं ।
मास्क लगाता हूं । सेनेटाइजर यूज कर रहा हूं । दो गज की दूरी मेंटन कर रहा हूं ।
और बात रही तेरे जैसे मुंह धोने की नाहने
की, तो सुन मेरे “प्ले बॉय” डरने की जरूरत तुझे है, मुझे नहीं । हमारा प्यार “प्लेटॉनिक लव” है । रूहानी इश्क । जिसमें जिस्म
की कोई जगह नहीं । जहां यौनाकषर्ण का कोई वजूद नहीं । न स्पर्श । न आलिंगन । वासना से उपासना की ओर
लेजाने वाला उदात्त प्रेम है हमारा । जहां संयम प्रेम की कसौटी है ।”
“तो तेरा मतलब है अपने को भी ट्रेक
बदलकर तेरे रास्ते पे चलना पड़ेगा । ये कोरोना अब हम युवान को “मर्यादा पुरूषोत्तम” बना कर ही छोड़ेगा ।” मोहन ने खीझते हुए कहा । सोहन बगल वाले कमरे में शिफ्ट हो गया । मोहन
चौदह दिन के लिए क्वारेंटाइन में है ।
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