रविवार, 26 अप्रैल 2020

कहानी - ‘कितने दूर कितने पास ’



कहानी  
कितने दूर कितने पास
-: सुनील सक्‍सेना

 सुधा सुबह के नाश्‍ते के लिए किचन में भजिये की तैयारी में जुटी थी । किचन से किसी डब्‍बे की गिरने की आवाज आई । कहीं बेसन का डब्‍बा तो नहीं गिरा ? यदि मेरा शक सही हुआ तो ये सीधा संकेत था कि बेसन खत्‍म हो गया है । अब लॉकडाउन में भजिए की फरमाइश बंद करिए । राशन का पुराना स्‍टॉक खत्‍म होता जा रहा है । फिर भी तसल्‍ली के लिए मैंने पूछ लिया – क्‍या गिरा  मेडम ?
 बेसन का डब्‍बा…”
 “यानी भजिए केंसिल ?”
 “नहीं बाबा थोड़ा बचा था मैंने पहले ही निकाल लिया था…”
 “थेंक्‍स गॉड । वरना दो दिन पुरानी ब्रेड खिलातीं तुम आज नाश्‍ते में…”

मैं ड्राइंग रूम में प्‍याज काट रहा हूं । मुझे प्‍याज काटने का कोई पूर्व अनुभव नहीं है । घर में सबसे बड़ा था । अम्‍मा ने किचन में कभी घुसने नहीं दिया । एकाध बार कोशिश भी की तो अम्‍मा ने बुरी तरह हड़काया – लड़कों का क्‍या काम रसोई में । अम्‍मा की फटकार सुनते ही मेरी दोनों छोटी बहनें रसोई में दौड़ी चली आतीं ।  आप भी न भैया अम्‍मा से जबरदस्‍ती डांट पड़वाते हो । शैफ बनने का भूत सवार है रहता है आपको ।  किसने कहा था किचन में जाने को ।

 एक प्‍याज अभी भी बाकी है काटने के लिए । अम्‍मा टीवी पर रामायण देख रही हैं । तुम आ गये हो नूर आ गया है नहीं तो चरागों से लौ जारही थी ...आंधी फिल्‍म का ये गाना जब कानों में सुनाई पड़ा तो मैंने प्‍याज के आंसुओं से लबालब दोनों आंखों को आस्‍तीन से पोंछते हुए कहा -  अम्‍मा ये रामायण देखते - देखते आप कहां फिल्‍म चैनल पर चली गईं  ?”

बेटा मैं तो रामायण ही देख रही हूं । ये सुधा की आवाज है । वो गा रही है । जब तेरे लिए सुधा को देखने गये थे तो उसने बड़ा सुंदर भजन सुनाया था । मैंने उसकी सुरीली तान सुनते ही तेरे लिए फाइनल कर दिया था । अब तुझे नौकरी से  फुरसत मिले तो पता चले कि सुधा कितना अच्‍छा गाती है । पागलों की तरह दिन- रात दौड़ता रहता है । चैन कहां है तुझे । ऐसी भी क्‍या नौकरी । वो तो भला हो लॉकडाउन का और तेरे वर्क फ्रॉम होम का जो घर में टिका है तू ।  टीवी पर सीता स्‍वयंवर चल रहा था । अम्‍मा ने अपनी बात कहने के लिए टीवी का साउंड म्‍यूट कर दिया था ।

मन हुआ किचन में जाकर सुधा से कहूं – “यार क्‍या कमाल का गाती हो..” पर मुझे पता है वो ताना मारेगी – “जनाब को दस साल बाद पता चला मेरे इस हुनर का…” । मैं खामोशी से अंतिम बचे प्‍याज  को काटने में लग गया । सोच रहा था कि जीवन की इस आपाधापी में कितना कुछ छूट जाता है । कितनी चीजें अनदेखी रह जाती हैं । कितना कुछ अनसुना रह जाता है । किसी और का नहीं अपनों का ।  आंखों से प्‍याज वाले आंसू नाक के पास से गुजरते हुए होंठों तक आ गये । जबान फेरी तो हल्‍के नमकदार हो गए थे आंसू ।

तभी परी दौड़ती हुई मेरे पास आई । उसके हाथ में ड्राइंग शीट थी ।
पापा ये देखो मेरी ड्राइंग
दिखाओ भाई हमारी परी ने क्‍या बनाया है..” ड्राइंग शीट मेरे हाथ में थी ।
ये जो गोल गोल है न हमारी अर्थ है । परी ने दोनों हाथों को गोलाकार फैलाते हुए कहा ।    और ये अर्थ के ऊपर जो छोटी-छोटी चोटीसी हैं न ये कोरोना है । ये नीचे जो इत्‍ते सारे लोग खड़े हैं, इसमें आप, मम्‍मी, दादी और मैं भी हूं । यानी हम सब । हमारा इंडिया । परी किसी कुशल चित्रकार की तरह मुझे अपनी रचना समझा रही थी  ।  मैं कभी ड्राइंग को कभी परी को विस्मित निगाहों से देख रहा था । सोच का उम्र से कोई नाता नहीं होता है ।  

पापा आपने पूछा नहीं इस ड्राइंग का मैंने क्‍या नाम रखा है ?”
क्‍या ?”
 हम होंगे कामयाब । अब बताओ कैसी लगी मेरी ड्राइंग पापा ?”
बहुत सुंदर । पर हमारी परी ने तो कभी बताया नहीं कि वो इतनी अच्‍छी ड्राइंग बना लेती     है..”
मैं तो रोज बनाती हूं । पर आप तो रात को लेट आते हो ऑफिस से । तब तक मैं सो जाती हूं । आपको कैसे पता चलेगा..”
मेरी प्‍यारी बिटिया परी  मैंने परी को सीने से लगा लिया ।

नाश्‍ते के लिए सुधा, अम्‍मा, परी और मैं सब ड्राइंग रूम में एक साथ बैठे थे । मुझे याद नहीं ऐसा पहले कब हुआ ।  रामायण का एपिसोड खत्‍म होने को है । प्रसारण बीच में रूक गया । ब्रेकिंग न्‍यूज । सरकार ने देश में लॉकडाउन का समय पन्‍द्रह दिन और बढ़ाया । अम्‍मा ने पलट कर मुझे देखा । सुधा कनखियों से देखकर मुस्‍करा रही थी । परी मेरे गले से लिपट गई ।

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16 टिप्‍पणियां:

  1. अहा क्या कहूँ क्या लिखूं आपकी इस आपबीती के लिए । आपके लिए जादू की झप्पी , परी के लिए स्नेह अम्मा को प्रणाम और मैम के लिए दुआएं । बहुत कमाल ।

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  2. लॉक डाउन की वजह से हम लोग अपने ही परिवार से पुनः: परिचित हो रहे हैं।
    बढ़िया कहानी...

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  3. प्रांजल भाषा मोहित कर लेने की क्षमता आभार

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  4. इस लॉक डाउन में बहुत कुछ बदला है !

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  5. बहुत अच्छी कहानी. कोरोनाकाल में काफी लोगों के जीवन में काफी बदलाव आए. समय की कमी से जिन रिश्तों को अनदेखी किया गया था, अब निकट आए.

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  6. इस लॉकडाउन ने बहुत कुछ सिखाने की कोशिश की है लोगों को, बशर्ते लोग सीखना चाहें.

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  7. अपनो को अपने होने का अहसास कराना जरूरी है, तभी दूरियां घटती है,बहुत सुंदर कहानी

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आपके विचार