मंगलवार, 9 जून 2020

हास्‍य व्‍यंग्‍य - बंटी बबली का प्रेम और कोरोना




हास्‍य व्‍यंग्‍य
बंटी बबली का प्रेम और कोरोना
                                                                                   -: सुनील सक्‍सेना
                            
                बंटी नगर निगम में  मुलाजिम है ।  वो कचरा उठानेवाली गाड़ी पर अटैच है  । कचरा गाड़ी में इन दिनों एक गाना बजता है  गाड़ीवाला आया घर से कचरा निकाल….” । जैसे ही इस गाने की आवाज सुनाई पड़ती है,  रॉयल कॉलोनी के रहवासी कचरे की थैलियां हाथों में लिए,  मुंह पर कपड़ा बांधे बाहर आजाते हैं ।

रॉयल कॉलोनी से लगी हुई झुग्‍गी बस्‍ती है सूरज  नगर ।  बंटी की गाड़ी वहां भी कचरा उठाने जाती है । गंदगी  करने का राइट  सिर्फ अमीरों के पास नहीं है । गरीब के घर से भी कचरा निकलता है । फर्क बस अमीर और गरीब के घर से  निकलने वाले कचरे में है ।  रॉयल कॉलोनी के कचरे में होती है चूसी हुई बोटियां, फलों के छिलके, स्‍कॉच और वाइन की खाली बोतलें । सूरज नगर के कचरे में  होती हैं सड़ी बुसी रोटियां, चावल जो रॉयल कॉलोनी में काम करनेवाली बाइयों को मेमसाब बड़े ठसके से देती हैं ।

कोरोना के चलते इन दिनों रॉयल कॉलोनी वाले  ज्‍यादा डरे हुए हैं । पहली बार हुआ है, ये एलीट क्‍लास  इतना मौत से भयभीत है । वरना सूरज नगर में ही मलेरिया, डेंगू , स्‍वाइन फ्लू जैसी बीमारियां अपना अड्डा  बरसों से जमाऐ हुए थे ।  कचरा गाड़ी के आते ही  कॉलोनी वाले कचरे की थैली बराबर दो गज की दूरी पर रख देते हैं । दूरियां तो पहले भी थीं । कोरोना ने और बढ़ा दी । पर सूरज  नगर में ऐसा नहीं है । डिसटेंस वही पुरानावाला  मेंटेन है  । बस सूरज नगर वाले अब आपस में गले नहीं मिलते हैं ।   

बंटी की एक बबली है सूरज नगर में ।  प्‍यार की कोपलों को  फूटे हुए ज्‍यादा दिन नहीं हुए हैं ।  प्रेम  बस  परवान चढ़ ही रहा है । गाड़ी की आवाज सुनते ही बबली रोज दरवाजे पर खड़ी हो जाती है । गरीब के साथ बड़ी मुसीबत है,  उसके घर से हर दिन कचरा नहीं निकलता ।  आज जब बबली बाहर आई तो उसके के हाथ में कचरे की थैली थी ।

तेरा बाप आ गया लगता है ।बंटी ने कचरे की थैली लेते हुए पूछा ।
नहीं। वो तो एक हफ्ता पहले झांसी से पैदल निकला है । जब निकला था तभी फोन किया था । तब से कोई खबर नहीं ।बबली ने दुपट्टे से मुंह ढंकते हुए कहा ।
तो तेरी मां आगई क्‍या ?”
हां.. । कल कर्फ्यू  में एक घंटे की ढील थी । साब अपनी गाड़ी से छोड़कर गये उसको । गये सात दिन से साब  के घर पर थी । तू बता कैसा है ?
मैं ठीक हूं । बंटी ने जोर से छींकते हुए कहा 
तू छींका ?”
मैं कहां.. नहीं.. नहीं मैं तो बस ऐसे ही खांसा
तू छींका अभी.. खांसा भी । झूठ मत बोल ।
मैं सच्‍ची बोल रहा हूं बबली । न मैं छींका न खांसा । तेरी कसम ।
चल दूर हट । तुझको कोरोना लग गया । चल जा अभी ।
ये तो कचरे की एलर्जी है रे । मां कसम । तुझको भरोसा नहीं तो ले छू के देखले । कोरोना में बुखार भी आता है । मैं तो एकदम कूल हूं ।बंटी ने अपना हाथ बबली के हाथ को लगभग टच कर दिया  
मैंने कहा न दूर रह अभी । घर जा । अब  फटकना नहीं इधर ।  बबली  छिटककर ूघर के अंदर चली गई  
कचरा गाड़ी का ड्राइवर हॉर्न पर हॉर्न बजाए जारहा था । चल बंटी चल । हो गया तेरी प्रेम कहानी का दी एंड ।
बंटी कचरा गाड़ी में पीछे लटक गया ।  वो निराशा में बुदबुदाया  -  रे !  कोरोना  लोगों की जीवन लीला के अंत के पीछे तो तू पड़ा ही है,  हम मासूमों की प्रेम लीला पर तो रहम कर  

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9 टिप्‍पणियां:


  1. कचरा गाड़ी का ड्राइवर हॉर्न पर हॉर्न बजाए जारहा था । “चल बंटी चल । हो गया तेरी प्रेम कहानी का दी एंड ।”
    बंटी कचरा गाड़ी में पीछे लटक गया । वो निराशा में बुदबुदाया - रे ! कोरोना लोगों की जीवन लीला के अंत के पीछे तो तू पड़ा ही है, हम मासूमों की प्रेम लीला पर तो रहम कर ।बहुत खूब

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  2. सुनील भैया नमस्कार बहुत बेहतरीन

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  3. ग़रीब घरों में निकलता है सड़ा गला खाना जो अमीर घरों से मिलता है। बहुत बढ़िया कटाक्ष। कोरोना में बहुत कुछ का अंत हो रहा है। जीवन का भी रिश्तों का भी।

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